जानिए अक्टूबर माह में कब-कब पड़ेंगे कौन से तीज-त्योहार
शक्ति की साधना का महापर्व है नवरात्रि, जो कि इस साल 17 अक्टूबर 2020 से शुरू होकर 24 अक्टूबर 2020 तक मनाया जाएगा. अधिक मास के कारण इस साल दशहरा (Dussehra) 26 अक्टूबर 2020 को मनाया जाएगा.
नई दिल्ली: साल 2020 के अक्टूबर माह की शुरुआत पूर्णिमा से होगी. इसी महीने शक्ति का महापर्व शारदीय नवरात्र (Navratri) भी मनाया जाएगा. नवरात्रि के 9 दिनों तक मां जगदंबे की साधना-आराधना के साथ दुर्गा पूजा और विजयादशमी (Vijayadashami) का महापर्व भी मनाया जाएगा. इसी अक्टूबर माह में अमावस्या (Amavasya), पूर्णिमा (Purnima) और एकादशी (Ekadashi) की पावन तिथियां भी पड़ेंगी. आइए जानते हैं अक्टूबर माह के प्रमुख तीज-त्योहार और महत्वपूर्ण तिथियों के बारे में.
नवरात्र में 9 दिन की साधना का शुभ मुहूर्त
कोई भी साधना बगैर शक्ति के पूर्ण नहीं हो सकती है. आप किसी भी देवता की पूजा करते हों लेकिन यदि आपने शक्ति की साधना नहीं की तो आपकी पूजा अधूरी मानी जाती है. इसी शक्ति की साधना का महापर्व है नवरात्रि, जो कि इस साल 17 अक्टूबर 2020 से शुरू होकर 24 अक्टूबर 2020 तक मनाया जाएगा. अधिक मास (Adhik Maas) के कारण इस साल दशहरा (Dussehra) 26 अक्टूबर 2020 को मनाया जाएगा. नवरात्र की नौ दिनों की साधना में पहले दिन कलश स्थापना का विशेष महत्व है. इस साल कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त 17 अक्टूबर 2020 को प्रात:काल 06:25 से 08:45 तक रहेगा. यदि आप किसी कारणवश कलश को शुभ मुहूर्त में स्थापित न कर पाएं तो अभिजीत मुहूर्त (प्रात: 11:43-दोपहर 12:29 तक) में भी स्थापित कर सकते हैं. नवरात्रि में जो लोग अष्टमी तक व्रत रखते हैं, उन्हें नवमी यानी 24 अक्टूबर 2020 की सुबह 07:00 बजे से पहले पारण करना होगा, जबकि नौ दिनों तक व्रत रखने वालों को दशमी यानी 25 अक्टूबर 2020 की सुबह 07:00 बजे से पहले पारण करना होगा. मां दुर्गा का विसर्जन 25 अक्टूबर को होगा.
एकादशी व्रत
अक्टूबर महीने की 13 तारीख को परम एकादशी और 27 तारीख को पापांकुशा एकादशी का व्रत पड़ेगा. मान्यता है कि इस पावन एकादशी के दिन भगवान विष्णु और भगवान शिव की पूजा करने पर सुख-समृद्धि के साथ बैकुंठधाम की प्राप्ति होती है.
प्रदोष व्रत
अक्टूबर माह की 14 एवं 28 तारीख को भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित प्रदोष व्रत रखा जाएगा. हिंदू पंचांग के अनुसार, त्रयोदशी तिथि के दिन प्रदोष व्रत पड़ता है. किसी भी दिन सूर्यास्त और रात्रि के संधिकाल को प्रदोष कहते हैं. प्रदोष काल में की जाने वाली शिव साधना अत्यंत ही शुभ और फलदायी होती है.
(R.P.S)